२१ सितम्बर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ ‘जाने जाँ’ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मर्डर मिस्ट्री में सुजॉय घोष का जवाब नहीं। ‘कहानी’, ‘तीन’ और ‘बदला’ जैसी रोमांचक थ्रिलर देने वाले सुजॉय एक बार फिर अपने अनूठे अंदाज से दर्शकों को सवा दो घंटे के लिए स्क्रीन से चिपके रहने के लिए बाध्य कर रहे हैं। रहस्य और रोमाँच से भरी इस दिलचस्प दास्तान में जयदीप अहलावत, विजय वर्मा और करीना कपूर खान की अदायगी ने चार चाँद लगा दिए हैं। सोशल मीडिया पर इसकी जमकर तारीफ़ हो रही है और करीना के इस नए अवतार को भी जनता की भरपूर सराहना मिल रही है। जाने जाँ एक अकेली माँ, माया डिसूज़ा (करीना कपूर खान), की कहानी है जो अपनी इकलोती बेटी तारा डिसूज़ा (नायषा खन्ना) के साथ कलिंगपोंग (पश्चिम बंगाल) जैसे छोटे शहर में सामान्य जीवन बिता रही है। उसके जीवन में उसका अतीत एक तूफ़ान लेकर आता है और इस तूफ़ान में उसका सामान्य-सा पड़ोसी टीचर, नरेन व्यास (जयदीप अहलावत) उलझ-सा जाता है। बात तब और गम्भीर हो जाती है जब इस तूफ़ान में उफ़ान लाने इंस्पेक्टर करण आनंद (विजय वर्मा) की एंट्री होती है। इन तीन मुख्य किरदारों के बीच उलझती-सुलझती मौत की पहेली कई दिलचस्प मोड़ों से होकर अपने क्लाइमैक्स पर पहुँचती है। और फिर जो सामने आता है उससे आपके होश उड़ेंगे या मुँह खुले-के-खुले रह जाएँगे जानने के लिए इस फ़िल्म को एक बार देखना तो बनता है।


इसमें कोई दो राय नहीं कि यदि कहानी अच्छी हो तो आधा काम यों ही आसान हो जाता है। फ़िल्म की कहानी जापानी लेखक कईगो हिगाशिनो की बहुचर्चित उपन्यास ‘द डिवोशन ऑफ़ सस्पेक्ट एक्स’ से ली गयी है किन्तु इस कहानी का निरूपण पूरी तरह से सुजॉय घोष के परिपक्व निर्देशन और सिनेमेटोग्राफर अविक मुखोपाध्याय के छायांकन पर निर्भर है और इन दोनों ही फ्रंट पर कमाल का काम देखने को मिलता है। लोकेशन कलिंगपोंग की धुंधली आबोहवा इस मर्डर मिस्ट्री की मिस्ट्री को और भी मिस्टीरियस बना रहा है। छोटे शहर की सादगी, एक-दूसरे को पहचानते सीधे-सादे लोग, एक हाई स्कूल, अपनी कमियों से जूझता - कभी संदिग्ध तो कभी बेहद नार्मल पेश आने वाला एक जीनियस टीचर, जिसके लिए गणित उसका एकमात्र प्यार है। एक बेहद होशियार पुलिस इंस्पेक्टर; केवल एक संदिग्ध किन्तु सारे सबूत उसके निर्दोष होने का इशारा कर रहे हैं – दरअसल इस फ़िल्म को इतनी होशियारी से आगे बढ़ाया गया है कि दर्शक अंत तक अटकल लगाते रह जाएँगे और अंत के बाद भी सकते में रहेंगे। सभी कलाकारों ने अपने किरदारों के साथ सम्पूर्ण न्याय किया है। करीना कपूर इस फ़िल्म के साथ पहली बार ओटीटी पर अपना खाता खोल रही हैं और माया डिसूज़ा के रूप में ऐसे ढल गयी हैं मानो इसी क़िरदार के लिए बनी हों। एक माँ का डर, एक अकेली महिला की आम ज़िन्दगी और उसी आम ज़िन्दगी से चुने कुछ ख़ास पलों में अपना सच बचाने की जद्दोजहद – सबकुछ बखूबी निभाया है करीना ने। यक़ीनन इस फ़िल्म ने करीना के लिए अदाकारी के नए दरवाज़े खोल दिए हैं। जयदीप और विजय तो ओटीटी के मँझे कलाकारों के रूप में स्थापित हैं ही, किन्तु इस फ़िल्म ने दोनों को अपने स्थापित पहचानों से अलग भूमिका देकर उनकी अदाकारी को एक नया विस्तार दिया है। इस फ़िल्म में विजय कभी ब्रूसली की स्टाइल में एक्शन करते नज़र आते हैं तो कभी माया के साथ रोमांस की सीमा में घुसते दिखते हैं। एक हीरो के रूप में उनकी छवि यक़ीनन लोगों का मन जीत लेगी, किन्तु एक पुलिस इंस्पेक्टर के तौर पर वे थोड़े कमज़ोर लग सकते हैं। वहीँ जयदीप एक जटिल क़िरदार बहुत ही सहजता और सरलता से निभाते नज़र आ रहे हैं। इस फ़िल्म से उन्होंने यह साबित कर दिया कि एक अच्छा कलाकार किसी भी क़िरदार को अपना बना लेता है। फ़िल्म में आपको केवल नरेन व्यास दिखेगा, जयदीप नहीं। गणित का एक जीनियस माइंड असल जीवन में भी अपनी हर चाल गणित के समीकरणों के हिसाब से चलता है – कभी वह एकदम शातिर है, कभी बेहद नादान, कभी एक डिप्रेस्ड पड़ोसी है तो कभी हीं भावना से ग्रसित एक आम इंसान – उसका जीवन शतरंज की एक बिसात है जिसकी हर चाल उसने पहले से सोच रखी है और उसके सभी मोहरे उसी की चाल चल रहे हैं। दिमाग का ऐसा दाव-पेंच कि इसे देखने के बाद थोड़ी देर तक उसकी हर चाल आप एकबार फिर ज़रूर सोचेंगे।


माया के पति की भूमिका में सौरभ सचदेव ने भी बड़ा प्रभाव छोड़ा है। स्क्रीन प्रजेंस कम होने के बावजूद उस क़िरदार का असर लम्बे समय तक महसूस होता है। फ़िल्म में मात्र दो गाने हैं जिनका संगीत सचिन जिगर ने दिया है। नेहा कक्कड़ की आवाज़ में टाइटल ट्रैक ‘जाने जाँ’ आपकी ज़ुबान पर चढ़ सकता है हालाँकि यह 1969 में आई ‘इंतकाम’ के एक गीत ‘आ जाने जाँ’ का रीमेक है, जिसे तब लता मंगेशकर ने गाया था और हेलन पर फिल्माया गया था। फ़िल्म की एक बात जो आपको खटक सकती है वह है इसका अंत। फ़िल्म का अंत मन में कई सवाल उठा सकता है किन्तु संतोषजनक जवाब शायद ही मिले। कुल मिला कर एक मज़ेदार मिस्ट्री है जाने जाँ जो आपको किसी भी पल मायूस नहीं होने देगी।   


*विभिन समाचारपत्रों में प्रकाशित